Pandit Ajay Gautam is widely recognized as one of the best and most reputed astrologers in India

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ज्योतिष के 20 अनोखे अचूक व प्रमाणित सूत्र

ज्योतिष के 20 अनोखे अचूक व प्रमाणित सूत्र

  1. लग्नेश द्वादश या बाहरवें भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति के शत्रु अधिक होते हैं और उन पर झूठे आरोप लग सकते हैं; आत्महत्या के विचार भी आ सकते हैं।

  2. राहु की महादशा में केतु की अंतर्दशा विशेष कष्टदायक होती है; उलझनें और समस्याएँ बढ़ जाती हैं।

  3. धनेश (द्वितीयेश) नवम या एकादश भाव में हो तो बाल्यकाल कष्टदायक, लेकिन बाद का जीवन सुखमय होता है।

  4. लग्नेश और धनेश का स्थान परिवर्तन (लग्नेश दूसरे भाव में, धनेश लग्न में) धन की कभी कमी नहीं रहती, कम प्रयास में धन मिलता है।

  5. सूर्य एकादश भाव में हो तो शत्रु अधिक होते हैं, लेकिन जातक उन पर विजय पाता है।

  6. अष्टमेश पर गुरु की दृष्टि हो तो व्यक्ति दीर्घायु होता है।

  7. स्त्री की कुंडली में दूसरे भाव में राहु हो तो स्वदेश में सुख नहीं मिलेगा; विदेश में रहना शुभ है।

  8. शनि उच्च राशि में और मंगल की दृष्टि हो तो जातक में नेतृत्व क्षमता प्रबल होती है।

  9. शुक्र एकादश भाव में हो तो विवाह के बाद अच्छा धन लाभ होता है।

  10. एकादश भाव का स्वामी लग्न में हो तो हर 11वें दिन कोई न कोई लाभ अवश्य होता है।

  11. शुक्र लग्न में हो तो व्यक्ति खुशमिजाज, गाने का शौकीन और आमोद-प्रमोद प्रिय होता है।

  12. शनि लग्न में और गुरु केंद्र में हो तो पैतृक संपत्ति अवश्य मिलती है।

  13. लग्न, पंचम या नवम भाव में बुध-चंद्र की युति हो तो जातक विद्वान, बुद्धिमान या भविष्यवक्ता होता है।

  14. चंद्रमा पर उच्च ग्रह की दृष्टि हो तो जातक धनवान होता है (यह जरूरी नहीं कि वह परेशान न हो)।

  15. सूर्य के दोनों ओर कोई ग्रह हो (चंद्रमा छोड़कर) तो व्यक्ति तेज बोलने वाला, सफल और धनवान होता है।

  16. स्थिर लग्न (वृष, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) हो, शुक्र केंद्र में, चंद्र त्रिकोण में गुरु से युत, शनि दशम में—ऐसा व्यक्ति सुखी, प्रभावशाली, मंत्री/नेता बन सकता है।

  17. लग्न में चंद्रमा और शुक्र, सप्तम में शनि—ऐसे जातक को जीवन में बदनामी का सामना करना पड़ सकता है।

  18. लग्नेश दशम में और दशमेश लग्न में—ऐसा जातक किसी भी परिवेश में जन्म ले, बढ़िया जीवन जीता है।

  19. धन भाव और व्यय भाव के स्वामी नवम भाव में युति करें—ऐसा जातक जीवन में खूब धन कमाता है, पर पीढ़ियों के लिए नहीं छोड़ता।

  20. छठा, आठवां, बारहवां भाव में चंद्रमा, मंगल, शनि या राहु की युति—ऐसा जातक मानसिक रोग या प्रेत बाधा से ग्रस्त हो सकता है।

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