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ज्योतिष शास्त्र के 16 जोरदार सूत्र जो हर कुंडली पर लागू होते है

ज्योतिष शास्त्र के 16 जोरदार सूत्र जो हर कुंडली पर लागू होते है

ज्योतिष शास्त्र के 16 जोरदार सूत्र वे सिद्धांत हैं, जो किसी भी व्यक्ति की जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति देखकर जीवन के प्रमुख पहलुओं का विश्लेषण करने में सहायक होते हैं। ये सूत्र प्राचीन ज्योतिषाचार्यों द्वारा दिए गए हैं और आधुनिक समय में भी प्रासंगिक माने जाते हैं। नीचे प्रमुख 16 सूत्रों का सारांश दिया गया है, जो हर कुंडली पर लागू होते हैं:

  1. दशम भाव में राहु: जातक कार्यक्षेत्र में हमेशा शंका करता है, भ्रमित रहता है, लेकिन राजनीति या गुप्त कार्यों में प्रगति करता है।

  2. किसी ग्रह का अपने भाव को देखना: ऐसा ग्रह अपने भाव का प्रभाव कई गुना बढ़ा देता है।

  3. नवम भाव में शुक्र: पुरुष की कुंडली में भाग्यशाली पत्नी और जीवन में उन्नति में पत्नी का अहम योगदान।

  4. सप्तम भाव में वक्री शुक्र: जीवन में दो विवाह या गहरे संबंध बनते हैं।

  5. चतुर्थ भाव में चंद्रमा: जातक को मातृ सुख, वाहन, भवन और मानसिक शांति मिलती है, यदि चंद्रमा बलवान हो।

  6. पंचम भाव में राहु: संतान प्राप्ति में बाधा या विलंब आता है।

  7. सप्तम भाव में शुक्र: पुरुष की कुंडली में यह तलवार की धार जैसा है—दांपत्य जीवन में उतार-चढ़ाव, स्त्री की कुंडली में शुभ।

  8. नवम भाव में राहु या शनि: प्रारंभिक जीवन में गुरुओं का अनादर, बाद में साधना में रुचि।

  9. दूसरे भाव में गुरु: जातक की वाणी, आचरण और धन पवित्र और सुसंस्कृत होते हैं।

  10. 6, 8, 12 भाव में केतु: दीर्घकालिक रोग या बार-बार लौटने वाले रोग होते हैं।

  11. केंद्र (1, 4, 7, 10) में गुरु: कुंडली के दोषों का शमन, गंभीर बीमारियों से रक्षा और आयु वृद्धि।

  12. केंद्र में शनि: आयु वृद्धि, जीवन में स्थिरता।

  13. सूर्य का बलवान होना: विपरीत परिस्थितियों में भी जातक संघर्ष कर निकल जाता है।

  14. आत्मकारक ग्रह का बलवान होना: करियर और व्यवसाय में बुरे समय में भी नुकसान कम होता है।

  15. नवमांश कुंडली में तीन या अधिक उच्च ग्रह: जीवन सुखी और संपन्न होता है, भले ही मूल कुंडली सामान्य हो।

  16. शनि और शुक्र दोनों बलवान हों: इनकी महादशा-अंतरदशा में आर्थिक संकट आ सकता है, विशेष ध्यान रखें।

अगर कुंडली में सूर्य और चंद्रमा दोनों मजबूत हैं, तो अच्छे योगों का प्रभाव बढ़ जाता है और खराब योगों का दुष्प्रभाव कम हो जाता है। इन सूत्रों का उपयोग कर आप अपनी या किसी की भी कुंडली के प्रमुख संकेत समझ सकते हैं। ध्यान रखें, ये सामान्य सूत्र हैं—व्यक्तिगत विश्लेषण के लिए विशेषज्ञ की राय आवश्यक है।

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